Menu

Navigation

  • HOME
  • ENERGY VASTU
  • BRACELETS
  • PENDANTS
  • RUDRAKSHA
  • 199 Store
  • Snowflake Obsidian Frame Heart Shape Pendant
    Snowflake Obsidian Frame Heart Shape Pendant
    ₹1099₹448
    Shop Now
    5 Mukhi Rudraksha & Bodhi Bead Bracelet
    5 Mukhi Rudraksha & Bodhi Bead Bracelet
    ₹1199₹674
    Shop Now
    Garbh Gauri Rudraksha / Nepali Rudraksha with Certificate
    Garbh Gauri Rudraksha / Nepali Rudraksha with Certificate
    ₹12600₹7200
    Shop Now
    Aquamarine Bracelet With Silver Charm – Remedywala
    Aquamarine Bracelet With Silver Charm – Remedywala
    ₹4099₹3099
    Shop Now
    Tiger Eye and Blue Tiger Eye Bracelet
    Tiger Eye and Blue Tiger Eye Bracelet
    ₹1099₹538
    Shop Now
    Rose Quartz Stone Grapes
    Rose Quartz Stone Grapes
    ₹1099₹520
    Shop Now

    हनुमान-शाबर-मन्त्र


    ‘कल्याण’ के हनुमान अङ्क’ से उद्धृ त
    १. सिर – पीड़ाः— पीड़ित व्यक्ति को दक्षिणाभिमुख – मुख बैठा कर उसके सिर को अपने हाथ से
    पकड़े । फिर निम्न ‘शाबर मन्त्र’ का उच्चारण करते हुए झाड़े —
    मन्त्रः—
    “लङ्का में बैठ के माथ हिलावे हनुमन्त ।
    सो देखि के राक्षस-गण पाय दुरन्त ॥
    बैठी सीता देवी अशोक वन में ।
    देखि हनुमान को आनन्द भई मन में ।
    गई उर विषाद, देवी स्थिर दरशाय ।
    “अमुक” के सिर व्यथा पराय ॥
    ‘अमुक’ के नहीं कछु पीर, नहिं कछु भार ।
    आदेश कामाख्या हरिदासी, चण्डी की दोहाई ॥”

    २. आधा सीसीः— निम्नलिखित दो ‘शाबर-मन्त्रों में से किसी एक का उच्चारण करते हुए भस्म से झाड़े

    मन्त्रः—
    (१) बन में ब्याई अञ्जनी, कच्चे बन-फल खाय ।
    हाँक मारी हनुवन्त ने, इस पिण्ड से आधा सीसी उतर जाय ॥
    (२) ॐ नमो बन में ब्याई बानरी, उछल वृक्ष पै जाय ।
    कूद – कूद शाखा-नरी, कच्चे वन – फल खाय ॥
    आधा तोड़े आधा फोड़े, आधा देय गिराय ।
    हङ्कारत हनुमान जी, आधा सीसी जाय ॥
    ३. नेत्र-रोगः— पीड़ित आँखों पर हाथ फेरते हुए निम्न मन्त्र सात बार पढ़कर फूँक मारे, तो व्यथा मिट
    जायगी —
    मन्त्रः—
    “ॐ नमो वने बिआई बानरी । जहाँ – जहाँ हनुवन्त आँखि पीड़ा, कषावरि गिहिया थनै लाइ,
    चरिउ जाइ भस्मन्तन । गुरू की शक्ति, मेरी भक्ति, फुरो मन्त्र ईश्वरी वाचा ॥”
    ४. कर्ण-मूल-पीड़ाः— विभूति से निम्न मन्त्र द्वारा सात बार झाड़ने से कर्ण-रोग नष्ट होते हैं —
    मन्त्रः—
    “वनरा गाँठि वानरी, तो डाँटे हनुमान कण्ठ ।
    बिलारी बाँधी थनैली, कर्ण – मल सम जाइ ।
    श्रीरामचन्द्र की बानी, पानी पथ होइ जाइ ॥”
    ५. बिच्छू का विषः— निम्नलिखित दो ‘शाबर मन्त्रों में से किसी एक के द्वारा झाड़ने से बिच्छू का विष
    शान्त होता है । मन्त्र का प्रयोग करने के पूर्व किसी मङ्गलवार को उसका एक लाख जप कर उसके
    दशांश या दस सहस्र आहुतियों द्वारा हवन कर उसे सिद्ध कर ले —
    मन्त्रः—
    (१) पर्वत ऊपर सुरही गाइ । कारी गाइ की चँमरी पूँछी । तेकरे गोबरे विछी बिआइ । बिछी तौरे
    कर अठारह जाति । छः कारी, छः पीअरी, छः भूमाधारी, छः रत्न-पवारी, छः कुं हुं कुं हुं छारि ।
    उतरु बिछी हाड़-हाड, पोर-पोर ते । कस मारे लील-कण्ठ गर मोर, महादेव की दुहाई, गौरा
    पार्वती की दुहाई, अनीत टेहरी शडार बन छाइ, उतरहि बीछी हनुमन्त की आज्ञा, दुहाई हनुमन्त
    की ॥
    (२) ॐ हरि-मर्कट मर्कटाय स्वाहा ॥
    ६. अण्ड-वृद्धि एवं सर्प-निवारणः— निम्न ‘शाबर मन्त्र’ पढ़कर फूले हुए अण्ड-कोश को हलके हाथ से
    मले तथा अभिमन्त्रित जल को पिलाए, तो अण्ड-वृद्धि शान्त हो जाती है —
    मन्त्रः—
    “ॐ नमो आदेश गुरू को । जैसे के लेहु रामचन्द्र कबूत । ओसई करहु राध बिनि कबूत । पवन
    – पूत हनुमन्त धाउ । हर – हर रावन कूट मिरावन । श्रवइ अण्ड, खेतहि धवइ, अण्ड-अण्ड
    विहण्ड । खेतहि श्रवइ, वाजं गर्भहि श्रवइ, स्त्री पीलहि अवइ शाप । हर हर केम्बीर, हर जम्बीर,
    हर हर हर ॥”
    सर्प – निवारण हेतु मिट्टी के एक ढेले को उक्त मन्त्र से अभि-मन्त्रित कर साँप के बिल पर रखे, तो साँप
    निकल जाता है ।
    ७. भूत-प्रेत-बाधाः— निम्न मन्त्र के प्रयोग से भूत – प्रेत की बाधा दूर होती है ।
    मन्त्रः—
    “बाँधो भूत, जहाँ तू उपजो, छाड़ो गिरे, पर्वत चढ़ाइ, सर्ग दुहेली, तुजभि झिलिमिलाहि । हुँकारे
    हनुवन्त, पचारइ भीमा, जरि जारि-जारि भस्म करे. जौं चापें सींउ।सीं
    ८. चूहा-उपद्रवः— स्नान कर हल्दी की पाँच गाँठों और अक्षत लेकर निम्न मन्त्र को पढ़कर, जहाँ चूहे
    आते हों, हों वहाँ पर या खेत में डाल दें । इससे चूहे भाग जाते हैं —
    मन्त्रः—
    “पीत पीताम्बर मूशा गाँधी ले, जाइहु हनुवन्त तु बाँधी ॥
    ए हनुवन्त ! ला के राउ ! एहि कोणे पैसेहु, एहि कोणे जाउ ॥”
    ६. सुअर और चूहा-उपद्रवः— क्रमाङ्क ८ की विधि के अनुसार ही निम्न मन्त्र का भी प्रयोग करना
    चाहिए —
    मन्त्रः—
    “हनुवन्त धावति, उदरहि ल्यावे, बाँधि अब खेत खाय सूअर और घर माँ रहे मुस । खेत-धर
    छाँड़ि, बाहर भूमि जाइ । दोहाइ हनुमान की, जो अब खेत मँह सूअर, घर मँह मूस जाइ ॥”
    १०. शरीर-रक्षाः— एक हजार जप करने से निम्न मन्त्र की सिद्धि होती है । इसके बाद इस मन्त्र के तीन
    बार उच्चारण मात्र से कार्य-सिद्धि होती है –
    मन्त्रः—
    “ॐ नमः वज्र का कोठा, जिसमें पिण्ड हमारा पैठा । ईश्वर कुञ्जी, ब्रह्म का ताला । मेरे आठो याम
    का, यती हनुवन्त रखवाला ॥”
    ११. अर्श-रोगः— रात्रि के रखे हुए जल को निम्न मन्त्र से अभि-मन्त्रित करके शौच-समय प्रक्षालन करे,
    तो बवासीर नष्ट हो जाती है । एक लाख जप करनेवाले को जीवन में कभी बवासीर होती ही नहीं —हीं
    मन्त्रः—
    ” ॐ काका कता क्रोरी कर्ता ॐ । करता से होय यरसना, दश हंस प्रकटे । खूनी-बादी बवासीर
    न होय । मन्त्र जान के न बतावे, द्वादश ब्रह्म-हत्या का पाप होय । लाख जप करे, तो उसके वश
    में न होय । शब्द साँचा, पिण्ड काँचा, तो हनुमान का मन्त्र साँचा, फुरो मन्त्र, ईश्वर वाचा ॥”

    १२. पीलिया रोगः— निम्न मन्त्र से पाण्डु-रोगी को झाड़ने से पीलिया-रोग दूर होता है —
    मन्त्रः—
    “ॐ नमो वीर वैताल, असराल नारसिंह देव । खादी तुपार्दी पीलिया कूं भिदाती । कारै झारै
    पीलिया रहै न नेक निशान । जो कहीं रह जाय, तो हनुमान की आन । मेरी भक्ति, गुरु की
    शक्ति, फुरो मन्त्र, ईश्वरो वाचा ॥”
    १३. दाँत का कीड़ाः— एक लाख जप से निम्न मन्त्र की सिद्धि होती है । जप का आरम्भ दीपावली की
    रात्रि से करना चाहिए । मन्त्र सिद्ध होने पर नीम की शाखा से झाड़ने पर पीड़ा तत्काल नष्ट हो जाती है ।
    मन्त्रोच्चारण के साथ कागज या बाँस की नली से कीड़ेवाले दाँत को कटेरी के बीजों का धुआँ देने से
    कीड़े गिर जाते हैं —
    मन्त्रः—
    “ॐ नमो आदेश गुरु को । वन में ब्याई अंजनी, जिन जाया हनुमन्त । कीड़ा-मकड़ा-माकड़ा – ए
    तीनों भस्मन्त । गुरु की शक्ति, मेरी भक्ति, फुरो मन्त्र ईश्वरो वाचा ॥”
    १४. नेत्र-रोगः— निम्न मन्त्र को सिद्ध कर ११ बार उच्चारण करते हुए नीम की डाली से झाड़े । लगातार
    तीन दिन झाड़ने से नेत्र-रोग एवं पीड़ा शान्त हो जाती है ।
    मन्त्रः—
    “ॐ झलमल जहर भरी तलाई, अस्ताचल पर्बत से आई, जहाँ बैठा हनुमन्ता जाई । फूटे न पाके,
    करै न पीड़ा, जी हनुमन्त हरै पीड़ा । मेरी भक्ति, गुरु की शक्ति, फुरो मन्त्र ईश्वरो वाचा, सत्य
    नाम आदेश गुरु को ॥”
    १५. अग्नि-काण्डः— अग्नि-काण्ड से बचने के लिए निम्न मन्त्र का प्रयोग करना चाहिए —
    मन्त्रः—
    “अज्ञान बाँधो, विज्ञान बाँधो । घोरा घाट, आठ कोटि वैसन्दर बाँधो । अस्त हमारा भाई, आनहि
    देंखे, झझके मोहिं, देखे बुझाइ, हनुमन्त बाँधो । पाना होइ जाय, अग्नि भवेत के जस मत्ती हाथी
    होइ, वैसन्दर बाँधो । नारायण-साखि मोरी । गुरु की शक्ति, फुरो मन्त्र, ईश्वरो वाचा ॥”

    download (7)
    Kanakdhara Yantra 2D Plate
    Kanakdhara Yantra 2D Plate
    ₹1599₹826
    Shop Now
    Energized Wooden Sriparni Sri Yantra Plate (6 Inch Approx)
    Energized Wooden Sriparni Sri Yantra Plate (6 Inch Approx)
    ₹1599₹898
    Shop Now
    Kuber Yantra 2D Plate
    Kuber Yantra 2D Plate
    ₹1599₹727
    Shop Now
    Energized Shriparni Wooden Pyramid (6Inch – Hollow Inside)
    Energized Shriparni Wooden Pyramid (6Inch – Hollow Inside)
    ₹1096₹826
    Shop Now
    Kanakdhara Yantra Pyramid 3D (4 Inch Approx)
    Kanakdhara Yantra Pyramid 3D (4 Inch Approx)
    ₹2099₹907
    Shop Now
    Wooden Lotus Kamal Aasan
    Wooden Lotus Kamal Aasan
    Shop Now

    Related Post

    हनुमान-शाबर-मन्त्र


    ‘कल्याण’ के हनुमान अङ्क’ से उद्धृ त
    १. सिर – पीड़ाः— पीड़ित व्यक्ति को दक्षिणाभिमुख – मुख बैठा कर उसके सिर को अपने हाथ से
    पकड़े । फिर निम्न ‘शाबर मन्त्र’ का उच्चारण करते हुए झाड़े —
    मन्त्रः—
    “लङ्का में बैठ के माथ हिलावे हनुमन्त ।
    सो देखि के राक्षस-गण पाय दुरन्त ॥
    बैठी सीता देवी अशोक वन में ।
    देखि हनुमान को आनन्द भई मन में ।
    गई उर विषाद, देवी स्थिर दरशाय ।
    “अमुक” के सिर व्यथा पराय ॥
    ‘अमुक’ के नहीं कछु पीर, नहिं कछु भार ।
    आदेश कामाख्या हरिदासी, चण्डी की दोहाई ॥”

    २. आधा सीसीः— निम्नलिखित दो ‘शाबर-मन्त्रों में से किसी एक का उच्चारण करते हुए भस्म से झाड़े

    मन्त्रः—
    (१) बन में ब्याई अञ्जनी, कच्चे बन-फल खाय ।
    हाँक मारी हनुवन्त ने, इस पिण्ड से आधा सीसी उतर जाय ॥
    (२) ॐ नमो बन में ब्याई बानरी, उछल वृक्ष पै जाय ।
    कूद – कूद शाखा-नरी, कच्चे वन – फल खाय ॥
    आधा तोड़े आधा फोड़े, आधा देय गिराय ।
    हङ्कारत हनुमान जी, आधा सीसी जाय ॥
    ३. नेत्र-रोगः— पीड़ित आँखों पर हाथ फेरते हुए निम्न मन्त्र सात बार पढ़कर फूँक मारे, तो व्यथा मिट
    जायगी —
    मन्त्रः—
    “ॐ नमो वने बिआई बानरी । जहाँ – जहाँ हनुवन्त आँखि पीड़ा, कषावरि गिहिया थनै लाइ,
    चरिउ जाइ भस्मन्तन । गुरू की शक्ति, मेरी भक्ति, फुरो मन्त्र ईश्वरी वाचा ॥”
    ४. कर्ण-मूल-पीड़ाः— विभूति से निम्न मन्त्र द्वारा सात बार झाड़ने से कर्ण-रोग नष्ट होते हैं —
    मन्त्रः—
    “वनरा गाँठि वानरी, तो डाँटे हनुमान कण्ठ ।
    बिलारी बाँधी थनैली, कर्ण – मल सम जाइ ।
    श्रीरामचन्द्र की बानी, पानी पथ होइ जाइ ॥”
    ५. बिच्छू का विषः— निम्नलिखित दो ‘शाबर मन्त्रों में से किसी एक के द्वारा झाड़ने से बिच्छू का विष
    शान्त होता है । मन्त्र का प्रयोग करने के पूर्व किसी मङ्गलवार को उसका एक लाख जप कर उसके
    दशांश या दस सहस्र आहुतियों द्वारा हवन कर उसे सिद्ध कर ले —
    मन्त्रः—
    (१) पर्वत ऊपर सुरही गाइ । कारी गाइ की चँमरी पूँछी । तेकरे गोबरे विछी बिआइ । बिछी तौरे
    कर अठारह जाति । छः कारी, छः पीअरी, छः भूमाधारी, छः रत्न-पवारी, छः कुं हुं कुं हुं छारि ।
    उतरु बिछी हाड़-हाड, पोर-पोर ते । कस मारे लील-कण्ठ गर मोर, महादेव की दुहाई, गौरा
    पार्वती की दुहाई, अनीत टेहरी शडार बन छाइ, उतरहि बीछी हनुमन्त की आज्ञा, दुहाई हनुमन्त
    की ॥
    (२) ॐ हरि-मर्कट मर्कटाय स्वाहा ॥
    ६. अण्ड-वृद्धि एवं सर्प-निवारणः— निम्न ‘शाबर मन्त्र’ पढ़कर फूले हुए अण्ड-कोश को हलके हाथ से
    मले तथा अभिमन्त्रित जल को पिलाए, तो अण्ड-वृद्धि शान्त हो जाती है —
    मन्त्रः—
    “ॐ नमो आदेश गुरू को । जैसे के लेहु रामचन्द्र कबूत । ओसई करहु राध बिनि कबूत । पवन
    – पूत हनुमन्त धाउ । हर – हर रावन कूट मिरावन । श्रवइ अण्ड, खेतहि धवइ, अण्ड-अण्ड
    विहण्ड । खेतहि श्रवइ, वाजं गर्भहि श्रवइ, स्त्री पीलहि अवइ शाप । हर हर केम्बीर, हर जम्बीर,
    हर हर हर ॥”
    सर्प – निवारण हेतु मिट्टी के एक ढेले को उक्त मन्त्र से अभि-मन्त्रित कर साँप के बिल पर रखे, तो साँप
    निकल जाता है ।
    ७. भूत-प्रेत-बाधाः— निम्न मन्त्र के प्रयोग से भूत – प्रेत की बाधा दूर होती है ।
    मन्त्रः—
    “बाँधो भूत, जहाँ तू उपजो, छाड़ो गिरे, पर्वत चढ़ाइ, सर्ग दुहेली, तुजभि झिलिमिलाहि । हुँकारे
    हनुवन्त, पचारइ भीमा, जरि जारि-जारि भस्म करे. जौं चापें सींउ।सीं
    ८. चूहा-उपद्रवः— स्नान कर हल्दी की पाँच गाँठों और अक्षत लेकर निम्न मन्त्र को पढ़कर, जहाँ चूहे
    आते हों, हों वहाँ पर या खेत में डाल दें । इससे चूहे भाग जाते हैं —
    मन्त्रः—
    “पीत पीताम्बर मूशा गाँधी ले, जाइहु हनुवन्त तु बाँधी ॥
    ए हनुवन्त ! ला के राउ ! एहि कोणे पैसेहु, एहि कोणे जाउ ॥”
    ६. सुअर और चूहा-उपद्रवः— क्रमाङ्क ८ की विधि के अनुसार ही निम्न मन्त्र का भी प्रयोग करना
    चाहिए —
    मन्त्रः—
    “हनुवन्त धावति, उदरहि ल्यावे, बाँधि अब खेत खाय सूअर और घर माँ रहे मुस । खेत-धर
    छाँड़ि, बाहर भूमि जाइ । दोहाइ हनुमान की, जो अब खेत मँह सूअर, घर मँह मूस जाइ ॥”
    १०. शरीर-रक्षाः— एक हजार जप करने से निम्न मन्त्र की सिद्धि होती है । इसके बाद इस मन्त्र के तीन
    बार उच्चारण मात्र से कार्य-सिद्धि होती है –
    मन्त्रः—
    “ॐ नमः वज्र का कोठा, जिसमें पिण्ड हमारा पैठा । ईश्वर कुञ्जी, ब्रह्म का ताला । मेरे आठो याम
    का, यती हनुवन्त रखवाला ॥”
    ११. अर्श-रोगः— रात्रि के रखे हुए जल को निम्न मन्त्र से अभि-मन्त्रित करके शौच-समय प्रक्षालन करे,
    तो बवासीर नष्ट हो जाती है । एक लाख जप करनेवाले को जीवन में कभी बवासीर होती ही नहीं —हीं
    मन्त्रः—
    ” ॐ काका कता क्रोरी कर्ता ॐ । करता से होय यरसना, दश हंस प्रकटे । खूनी-बादी बवासीर
    न होय । मन्त्र जान के न बतावे, द्वादश ब्रह्म-हत्या का पाप होय । लाख जप करे, तो उसके वश
    में न होय । शब्द साँचा, पिण्ड काँचा, तो हनुमान का मन्त्र साँचा, फुरो मन्त्र, ईश्वर वाचा ॥”

    १२. पीलिया रोगः— निम्न मन्त्र से पाण्डु-रोगी को झाड़ने से पीलिया-रोग दूर होता है —
    मन्त्रः—
    “ॐ नमो वीर वैताल, असराल नारसिंह देव । खादी तुपार्दी पीलिया कूं भिदाती । कारै झारै
    पीलिया रहै न नेक निशान । जो कहीं रह जाय, तो हनुमान की आन । मेरी भक्ति, गुरु की
    शक्ति, फुरो मन्त्र, ईश्वरो वाचा ॥”
    १३. दाँत का कीड़ाः— एक लाख जप से निम्न मन्त्र की सिद्धि होती है । जप का आरम्भ दीपावली की
    रात्रि से करना चाहिए । मन्त्र सिद्ध होने पर नीम की शाखा से झाड़ने पर पीड़ा तत्काल नष्ट हो जाती है ।
    मन्त्रोच्चारण के साथ कागज या बाँस की नली से कीड़ेवाले दाँत को कटेरी के बीजों का धुआँ देने से
    कीड़े गिर जाते हैं —
    मन्त्रः—
    “ॐ नमो आदेश गुरु को । वन में ब्याई अंजनी, जिन जाया हनुमन्त । कीड़ा-मकड़ा-माकड़ा – ए
    तीनों भस्मन्त । गुरु की शक्ति, मेरी भक्ति, फुरो मन्त्र ईश्वरो वाचा ॥”
    १४. नेत्र-रोगः— निम्न मन्त्र को सिद्ध कर ११ बार उच्चारण करते हुए नीम की डाली से झाड़े । लगातार
    तीन दिन झाड़ने से नेत्र-रोग एवं पीड़ा शान्त हो जाती है ।
    मन्त्रः—
    “ॐ झलमल जहर भरी तलाई, अस्ताचल पर्बत से आई, जहाँ बैठा हनुमन्ता जाई । फूटे न पाके,
    करै न पीड़ा, जी हनुमन्त हरै पीड़ा । मेरी भक्ति, गुरु की शक्ति, फुरो मन्त्र ईश्वरो वाचा, सत्य
    नाम आदेश गुरु को ॥”
    १५. अग्नि-काण्डः— अग्नि-काण्ड से बचने के लिए निम्न मन्त्र का प्रयोग करना चाहिए —
    मन्त्रः—
    “अज्ञान बाँधो, विज्ञान बाँधो । घोरा घाट, आठ कोटि वैसन्दर बाँधो । अस्त हमारा भाई, आनहि
    देंखे, झझके मोहिं, देखे बुझाइ, हनुमन्त बाँधो । पाना होइ जाय, अग्नि भवेत के जस मत्ती हाथी
    होइ, वैसन्दर बाँधो । नारायण-साखि मोरी । गुरु की शक्ति, फुरो मन्त्र, ईश्वरो वाचा ॥”

    download (7)
    Save to Wishlist

    Please sign in to save products to your wishlist.

    Lost your password?

      Your Order and Tracking details will be shared on this number.

      Reset Password

      Enter your registered email address and we'll send you a reset link.