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    🙏 Hanuman Suprabhatam – Introduction

    “Hanuman Suprabhatam is an auspicious early morning hymn recited by devotees at sunrise as a form of worship and awakening of Lord Hanuman. This prayer glorifies His devotion, strength, and His protective grace towards His devotees.”

    🔶 Meaning and Interpretation of Hanuman Suprabhatam

    “Suprabhatam” means “a very auspicious morning” or “good morning.” This hymn is composed to awaken Lord Hanuman in the morning, offer salutations to Him, and meditate upon Him. Just as there is a ‘Vishnu Suprabhatam’ for Lord Vishnu and a ‘Rama Suprabhatam’ for Lord Rama, similarly, this Suprabhatam is dedicated to Lord Hanuman.

    📜 हनुमान् सुप्रभातं 📜

    श्री आञ्जनेय सुप्रभातमु
    अमल कनकवर्णं प्रज्वल त्पावकाक्षं
    सरसिज निभवक्त्रं सर्वदा सुप्रसन्नम् ।
    पटुतर घनगात्रं कुण्डलालङ्कृताङ्गं
    रण जय करवालं रामदूतं नमामि ॥

    अञ्जना सुप्रजा वीर पूर्वा सन्ध्या प्रवर्तते
    उत्तिष्ठ हरिशार्दूल कर्तव्यं दैवमाह्निकम् ।
    उत्तिष्टोत्तिष्ठ हनुमान् उत्तिष्ठ विजयध्वज
    उत्तिष्ठ विरजाकान्त त्रैलोक्यं मङ्गलङ्कुरु ॥
    [श्री राम भक्त अभय हनुमान् तवसुप्रभातम् ॥]

    श्री रामचन्द्र चरणाम्बुज मत्तभृङ्ग
    श्री रामचन्द्र जपशील भवाब्धिपोत ।
    श्री जानकी हृदयताप निवारमूर्ते
    श्री वीर धीर हनुमान् तव सुप्रभातम् ॥
    [श्री राम भक्त अभय हनुमान् तवसुप्रभातम् ॥]

    श्री राम दिव्य चरितामृत स्वादुलोल
    श्री राम किङ्कर गुणाकर दीनबन्धो ।
    श्री रामभक्त जगदेक महोग्रशौर्यं
    श्री वीर धीर हनुमान् तव सुप्रभातम् ॥
    [श्री राम भक्त अभय हनुमान् तवसुप्रभातम् ॥]

    सुग्रीवमित्र कपिशेखर पुण्य मूर्ते
    सुग्रीव राघव नमागम दिव्यकीर्ते ।
    सुग्रीव मन्त्रिवर शूर कुलाग्रगण्य
    श्री वीर धीर हनुमान् तव सुप्रभातम् ॥
    [श्री राम भक्त अभय हनुमान् तवसुप्रभातम् ॥]

    भक्तार्ति भञ्जन दयाकर योगिवन्द्य
    श्री केसरीप्रिय तनूज सुवर्णदेह ।
    श्री भास्करात्मज मनोम्बुज चञ्चरीक
    श्री वीर धीर हनुमान् तव सुप्रभातम् ॥
    [श्री राम भक्त अभय हनुमान् तवसुप्रभातम् ॥]

    श्री मारुतप्रिय तनूज महबलाढ्य
    मैनाक वन्दित पदाम्बुज दण्डितारिन् ।
    श्री उष्ट्र वाहन सुलक्षण लक्षिताङ्ग
    श्री वीर धीर हनुमान् तव सुप्रभातम् ॥
    [श्री राम भक्त अभय हनुमान् तवसुप्रभातम् ॥]

    पञ्चाननस्य भवभीति हरस्यराम
    पादाब्द सेवन परस्य परात्परस्य ।
    श्री अञ्जनाप्रिय सुतस्य सुविग्रहस्य
    श्री वीर धीर हनुमान् तव सुप्रभातम् ॥
    [श्री राम भक्त अभय हनुमान् तवसुप्रभातम् ॥]

    गन्धर्व यक्ष भुजगाधिप किन्नराश्च
    आदित्य विश्ववसु रुद्र सुरर्षिसङ्घाः ।
    सङ्कीर्तयन्ति तवदिव्य सुनामपङ्क्तिं
    श्री वीर धीर हनुमान् तव सुप्रभातम् ॥
    [श्री राम भक्त अभय हनुमान् तवसुप्रभातम् ॥]

    श्री गौतम च्यवन तुम्बुर नारदात्रि
    मैत्रेय व्यास जनकादि महर्षिसङ्घाः ।
    गायन्ति हर्षभरिता स्तव दिव्यकीर्तिं
    श्री वीर धीर हनुमान् तव सुप्रभातम् ॥
    [श्री राम भक्त अभय हनुमान् तवसुप्रभातम् ॥]

    भृङ्गावली च मकरन्द रसं पिबेद्वै
    कूजन्त्युतार्ध मधुरं चरणायुधाच्च ।
    देवालये घन गभीर सुशङ्ख घोषाः
    निर्यान्ति वीर हनुमान् तव सुप्रभातम् ॥
    [श्री राम भक्त अभय हनुमान् तवसुप्रभातम् ॥]

    पम्पा सरोवर सुपुण्य पवित्र तीर्ध-
    मादाय हेम कलशैश्च महर्षिसङ्घाः ।
    तिष्टन्ति त्वक्चरण पङ्कज सेवनार्थं
    श्री वीर धीर हनुमान् तव सुप्रभातम् ॥
    [श्री राम भक्त अभय हनुमान् तवसुप्रभातम् ॥]

    श्री सूर्यपुत्र प्रियनाथ मनोज्ञमूर्ते
    वातात्मज कपिवीर सुपिङ्गलाक्ष
    सञ्जीवराय रघुवीर सुभक्तवर्य
    श्री वीर धीर हनुमान् तव सुप्रभातम् ॥
    [श्री राम भक्त अभय हनुमान् तवसुप्रभातम् ॥]

     

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    “Suprabhatam” means “a very auspicious morning” or “good morning.” This hymn is composed to awaken Lord Hanuman in the morning, offer salutations to Him, and meditate upon Him. Just as there is a ‘Vishnu Suprabhatam’ for Lord Vishnu and a ‘Rama Suprabhatam’ for Lord Rama, similarly, this Suprabhatam is dedicated to Lord Hanuman.

    📜 हनुमान् सुप्रभातं 📜

    श्री आञ्जनेय सुप्रभातमु
    अमल कनकवर्णं प्रज्वल त्पावकाक्षं
    सरसिज निभवक्त्रं सर्वदा सुप्रसन्नम् ।
    पटुतर घनगात्रं कुण्डलालङ्कृताङ्गं
    रण जय करवालं रामदूतं नमामि ॥

    अञ्जना सुप्रजा वीर पूर्वा सन्ध्या प्रवर्तते
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    उत्तिष्टोत्तिष्ठ हनुमान् उत्तिष्ठ विजयध्वज
    उत्तिष्ठ विरजाकान्त त्रैलोक्यं मङ्गलङ्कुरु ॥
    [श्री राम भक्त अभय हनुमान् तवसुप्रभातम् ॥]

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    श्री राम दिव्य चरितामृत स्वादुलोल
    श्री राम किङ्कर गुणाकर दीनबन्धो ।
    श्री रामभक्त जगदेक महोग्रशौर्यं
    श्री वीर धीर हनुमान् तव सुप्रभातम् ॥
    [श्री राम भक्त अभय हनुमान् तवसुप्रभातम् ॥]

    सुग्रीवमित्र कपिशेखर पुण्य मूर्ते
    सुग्रीव राघव नमागम दिव्यकीर्ते ।
    सुग्रीव मन्त्रिवर शूर कुलाग्रगण्य
    श्री वीर धीर हनुमान् तव सुप्रभातम् ॥
    [श्री राम भक्त अभय हनुमान् तवसुप्रभातम् ॥]

    भक्तार्ति भञ्जन दयाकर योगिवन्द्य
    श्री केसरीप्रिय तनूज सुवर्णदेह ।
    श्री भास्करात्मज मनोम्बुज चञ्चरीक
    श्री वीर धीर हनुमान् तव सुप्रभातम् ॥
    [श्री राम भक्त अभय हनुमान् तवसुप्रभातम् ॥]

    श्री मारुतप्रिय तनूज महबलाढ्य
    मैनाक वन्दित पदाम्बुज दण्डितारिन् ।
    श्री उष्ट्र वाहन सुलक्षण लक्षिताङ्ग
    श्री वीर धीर हनुमान् तव सुप्रभातम् ॥
    [श्री राम भक्त अभय हनुमान् तवसुप्रभातम् ॥]

    पञ्चाननस्य भवभीति हरस्यराम
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    श्री अञ्जनाप्रिय सुतस्य सुविग्रहस्य
    श्री वीर धीर हनुमान् तव सुप्रभातम् ॥
    [श्री राम भक्त अभय हनुमान् तवसुप्रभातम् ॥]

    गन्धर्व यक्ष भुजगाधिप किन्नराश्च
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    सङ्कीर्तयन्ति तवदिव्य सुनामपङ्क्तिं
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    श्री गौतम च्यवन तुम्बुर नारदात्रि
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    भृङ्गावली च मकरन्द रसं पिबेद्वै
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    देवालये घन गभीर सुशङ्ख घोषाः
    निर्यान्ति वीर हनुमान् तव सुप्रभातम् ॥
    [श्री राम भक्त अभय हनुमान् तवसुप्रभातम् ॥]

    पम्पा सरोवर सुपुण्य पवित्र तीर्ध-
    मादाय हेम कलशैश्च महर्षिसङ्घाः ।
    तिष्टन्ति त्वक्चरण पङ्कज सेवनार्थं
    श्री वीर धीर हनुमान् तव सुप्रभातम् ॥
    [श्री राम भक्त अभय हनुमान् तवसुप्रभातम् ॥]

    श्री सूर्यपुत्र प्रियनाथ मनोज्ञमूर्ते
    वातात्मज कपिवीर सुपिङ्गलाक्ष
    सञ्जीवराय रघुवीर सुभक्तवर्य
    श्री वीर धीर हनुमान् तव सुप्रभातम् ॥
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