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    श्री अंजनेय मंगलम हनुमान जी को समर्पित एक प्रसिद्ध स्तोत्र है। इसे पढ़ने से संकट दूर होते हैं, मन की शांति मिलती है और सभी कार्य सफल होते हैं। यह हनुमान जी की शक्ति, भक्ति और करुणा की स्तुति करता है और विशेष रूप से मंगलवार और हनुमान जयंती पर इसका पाठ बहुत फलदायी माना जाता है।

    गौरीशिववायुवराय अंजनीकेसरीसुताय च।
    अग्निपंचकजाताय अंजनेयाय मंगलम।

    → जो गौरी, शिव और वायु के श्रेष्ठ हैं, अंजनी और केसरी के पुत्र हैं और अग्नि पंचक से उत्पन्न हुए, उन्हें अंजनेय (हनुमान) को मंगलकामना।

    वैशाखे मासि किष्णायां दशमीं मंदवासरे।
    पूर्वाभाद्रप्रभूताय अंजनेयाय मंगलम।

    → वैशाख महीने की कृष्ण पक्ष की दशमी को, पूर्वाभाद्र फलित होने पर, अंजनेय (हनुमान) को मंगलकामना।

    पंचाननाय भीमाय कालनेमिहराय च।
    कौंडिन्यगोत्रजाताय अंजनेयाय मंगलम।

    → पंचमुखी और भीम रूप वाले, कालनेमि (काल) के नाशक, कौंडिन्य गोत्र से जन्मे अंजनेय (हनुमान) को मंगलकामना।

    सुवर्चलाकलत्राय चतुर्भुजधराय च।
    उष्ट्रारूढाय वीराय अंजनेयाय मंगलम।

    → सुवर्चला की कलत्रा, चार भुजधारी और ऊँट पर चढ़ने वाले वीर अंजनेय (हनुमान) को मंगलकामना।

    दिव्यमंगलदेहाय पीताम्बरधराय च।
    तप्तकाञ्चनवर्णाय अंजनेयाय मंगलम।

    → दिव्य और मंगलमय शरीर वाले, पीताम्बरधारी और तप्त स्वर्ण वर्ण वाले अंजनेय (हनुमान) को मंगलकामना।

    करुणारसपूर्णाय फलापूप्रप्रियाय च।
    माणिक्यहारकंठाय अंजनेयाय मंगलम।

    → करुणा और प्रेम से पूर्ण, फल और फूल प्रिय, माणिक हार वाले अंजनेय (हनुमान) को मंगलकामना।

    भक्तरक्षणशीलाय जानकीशोकहारिणे।
    सृष्टिकारणभूताय अंजनेयाय मंगलम।

    → भक्तों की रक्षा करने वाले, सीता के शोक हरने वाले और सृष्टि के कारण बने अंजनेय (हनुमान) को मंगलकामना।

    रंभावनविहाराय गंधमादनवासिने।
    सर्वलोकैकनाथाय अंजनेयाय मंगलम।

    → रामभक्तों का सहारा, गंधमादन पर्वत में रहने वाले और सभी लोकों के एकनाथ अंजनेय (हनुमान) को मंगलकामना।

    हनुमान मंगलम का जाप करने से संकट दूर होते हैं और मन में साहस और शक्ति का संचार होता है।

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    गौरीशिववायुवराय अंजनीकेसरीसुताय च।
    अग्निपंचकजाताय अंजनेयाय मंगलम।

    → जो गौरी, शिव और वायु के श्रेष्ठ हैं, अंजनी और केसरी के पुत्र हैं और अग्नि पंचक से उत्पन्न हुए, उन्हें अंजनेय (हनुमान) को मंगलकामना।

    वैशाखे मासि किष्णायां दशमीं मंदवासरे।
    पूर्वाभाद्रप्रभूताय अंजनेयाय मंगलम।

    → वैशाख महीने की कृष्ण पक्ष की दशमी को, पूर्वाभाद्र फलित होने पर, अंजनेय (हनुमान) को मंगलकामना।

    पंचाननाय भीमाय कालनेमिहराय च।
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    → पंचमुखी और भीम रूप वाले, कालनेमि (काल) के नाशक, कौंडिन्य गोत्र से जन्मे अंजनेय (हनुमान) को मंगलकामना।

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    → सुवर्चला की कलत्रा, चार भुजधारी और ऊँट पर चढ़ने वाले वीर अंजनेय (हनुमान) को मंगलकामना।

    दिव्यमंगलदेहाय पीताम्बरधराय च।
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    → दिव्य और मंगलमय शरीर वाले, पीताम्बरधारी और तप्त स्वर्ण वर्ण वाले अंजनेय (हनुमान) को मंगलकामना।

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    → करुणा और प्रेम से पूर्ण, फल और फूल प्रिय, माणिक हार वाले अंजनेय (हनुमान) को मंगलकामना।

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    → भक्तों की रक्षा करने वाले, सीता के शोक हरने वाले और सृष्टि के कारण बने अंजनेय (हनुमान) को मंगलकामना।

    रंभावनविहाराय गंधमादनवासिने।
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    → रामभक्तों का सहारा, गंधमादन पर्वत में रहने वाले और सभी लोकों के एकनाथ अंजनेय (हनुमान) को मंगलकामना।

    हनुमान मंगलम का जाप करने से संकट दूर होते हैं और मन में साहस और शक्ति का संचार होता है।

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