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हनुमान कृपा स्तोत्र एक पवित्र संस्कृत रचना है, जो भगवान हनुमान की कृपा प्राप्त करने के लिए श्रद्धा और भक्ति से गाई या पढ़ी जाती है।यह स्तोत्र भगवान हनुमान के वीरता, असीम शक्ति, बुद्धि और करुणा का वर्णन करता है। इसे पढ़ने वाला साधक मानसिक, शारीरिक और आध्यात्मिक रूप से मजबूत होता है।

The Hanuman Kripa Stotra is a sacred Sanskrit composition, recited or sung with devotion and faith to seek the blessings of Lord Hanuman. This stotra describes the valor, immense strength, wisdom, and compassion of Lord Hanuman. A devotee who recites it becomes mentally, physically, and spiritually strong.

हनुमत् कृपा स्तोत्र सरल हिंदी अर्थ
बालस्य च क्रीडनकं पवित्रं
रक्षांसि मोहाद् यतमानि हन्ति।
तस्मै नमस्ते हरिसूनवे ते
भक्त्या कृपा सिध्यतु मे ह्यनन्ता॥ १॥
जैसे बच्चे का खिलौना उसे हर बुराई से बचाता है, वैसे ही हे पवनपुत्र! आपकी कृपा मेरे सभी भय और बाधाएँ दूर कर दे। मैं आपको प्रणाम करता हूँ— मुझे आपकी अनंत कृपा प्राप्त हो।
यत्रापदा यत्र च दुःखवर्गाः
यत्रामयो यत्र च दारिद्रयम्।
तत्रागतं त्वां हरिसूनु नाथं
स्मृत्वा मयूखैरिव भानुमीशम्॥ २॥
जहाँ भी परेशानी हो, जहाँ भी दुख हों, बीमारी हो या गरीबी— वहाँ आपका स्मरण करने से, सूर्य के प्रकाश की तरह अंधकार मिट जाता है।
सर्वापदां दारिद्रयस्यान्तकर्तारं
दुःखौघनाशं सुखवृन्ददातम्।
वन्दे महाव्याघ्रवदन्य वीरं
श्रीपावनपुत्रं शरणं प्रपद्ये॥ ३॥
हे वीर हनुमान! आप सभी बाधाओं को समाप्त करने वाले, गरीबी व दुखों को मिटाने वाले तथा सुख देने वाले हैं। मैं आपकी शरण में आता हूँ।
अञ्जनासुतं महावीर्यं महाविक्रमशोभितम्।
महाकायं महोत्साहं वन्दे त्वा मारुतात्मजम्॥ ४॥
मैं अंजनी के पुत्र हनुमान को प्रणाम करता हूँ, जो महान पराक्रमी, अत्यंत बलवान, विशाल शरीर वाले और अदम्य उत्साह से भरे हुए हैं।
नमोस्तु रामदूताय सर्वशत्रुनिबर्हिणे।
सर्वदुःखहरायाथ सर्वमङ्गलदायिने॥ ५॥
राम के दूत हनुमान जी को मेरा प्रणाम, जो सभी शत्रुओं का नाश करते हैं, सभी दुखों को हर लेते हैं और शुभ फल देते हैं।
पुत्रान् देहि धनं देहि यशो देहि बलं तथा।
दीर्घायुश्च देहि मे हनुमन् कृपया प्रभो॥ ६॥
हे प्रभु हनुमान! कृपा करके मुझे अच्छे पुत्र, धन, यश, बल और दीर्घायु प्रदान करें।
यानि कानिच पापानि जन्मान्तरीकृतानि च।
तानि सर्वाणि नश्यन्ति प्रसीद हनुमान् प्रभो॥ ७॥

हे प्रभु! मेरे जो भी पाप, इस जन्म या पिछले जन्मों से संचित हैं— आपकी कृपा से सभी नष्ट हो जाएँ।

इदं स्तोत्रं पठेद् भक्त्या श्रद्धया पवनेः सुतम्।
स सर्वान् कामानवाप्नोति ह्यसंशयं वदाम्यहम्॥ ८॥
जो व्यक्ति इस स्तोत्र को श्रद्धा और भक्ति से पढ़ता है, वह अपने सभी मनोवांछित फल अवश्य प्राप्त करता है— इसमें संदेह नहीं।

 

हनुमान कृपा स्तोत्र का महत्व:-

हनुमान कृपा स्तोत्र का महत्व अत्यंत आध्यात्मिक और प्रेरणादायी है। यह स्तोत्र भगवान हनुमान की महिमा, शक्ति और करुणा का गान करता है, जिससे साधक के जीवन में साहस, आत्मविश्वास और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। श्रद्धा से इसका पाठ करने पर व्यक्ति के जीवन से भय, चिंता और नकारात्मक शक्तियों का नाश होता है। यह न केवल मानसिक शांति प्रदान करता है, बल्कि कठिन परिस्थितियों में धैर्य और शक्ति भी देता है। मान्यता है कि हनुमान जी अपने भक्तों की रक्षा करते हैं, उनके जीवन में आने वाली बाधाओं को दूर करते हैं और सफलता के मार्ग को सुगम बनाते हैं। इस स्तोत्र का नियमित पाठ व्यक्ति के आध्यात्मिक उत्थान के साथ-साथ भौतिक जीवन में भी संतुलन और समृद्धि लाने में सहायक माना जाता है। इसके अतिरिक्त, हनुमान कृपा स्तोत्र का पाठ मन को एकाग्र और स्थिर बनाता है, जिससे साधक का ध्यान और संकल्प शक्ति बढ़ती है। यह व्यक्ति को आलस्य, नकारात्मक विचारों और जीवन की उलझनों से मुक्त कर, उसे सेवा, भक्ति और त्याग के मार्ग पर अग्रसर करता है। जब साधक इस स्तोत्र का जप पूरी श्रद्धा और निष्ठा से करता है, तो उसे हनुमान जी के दिव्य आशीर्वाद की अनुभूति होती है, जो उसके जीवन में सुख, शांति, साहस और सफलता का संचार करती है।

 

 

हनुमान कृपा स्तोत्र के माध्यम से, हम न केवल उनकी अद्भुत शक्ति और गुणों का स्मरण करते हैं, बल्कि अपने जीवन में भी उन गुणों को अपनाने की प्रेरणा प्राप्त करते हैं। यह स्तोत्र हमें सिखाता है कि कठिन से कठिन परिस्थिति में भी, यदि हम धैर्य, साहस और ईमानदारी बनाए रखें, तो किसी भी संकट का सामना किया जा सकता है।

Through the Hanuman Kripa Stotra, we not only remember His incredible strength and virtues but also gain inspiration to adopt those qualities in our own lives. This stotra teaches us that even in the most difficult situations, if we maintain patience, courage, and honesty, we can overcome any challenge.

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